शहरी ज़िंदगी शॉर्ट ड्रामा
60 टाइटल
शहरी ज़िंदगी में न कोई दूसरे समय या दूसरी दुनिया में पहुँचता है, न कोई रईस घराना है, न जादू — सिर्फ़ शहर और बहुत ठोस पेशे: दफ़्तर के कर्मचारी, रेसर, गाड़ी सुधारने वाले मैकेनिक, जुआ खेलने वाले, और वह लड़की जो पहली बार पहाड़ से नीचे उतरी है और पहली बार फ़ोन देख रही है। टकराव किराए, ठेके और ऊपर बैठे बॉस से आता है, किसी ख़ानदानी साज़िश से नहीं। अगर बाक़ी श्रेणियाँ आपको ज़रूरत से ज़्यादा नाटकीय लगती हैं, शुरुआत यहीं से कीजिए। कहानियाँ आम तौर पर 41–80 एपिसोड की होती हैं।
- (डबिंग) एयरपोर्ट पर छोड़ा पति
- एयरपोर्ट पर छोड़ा पति
- (डबिंग) दस साल, साँप का एहसान
- (डबिंग) मेरी इकलौती बेटी
- (Dubbed) Flight Se Dhakka Runway Pe Dhamaka
- Flight Se Dhakka Runway Pe Dhamaka
- मेरी इकलौती बेटी
- (Dubbed) Billionaire Ex-Wife Ka Pachtawa
- खदान का मज़दूर, असली कमांडर
- Billionaire Ex-Wife Ka Pachtawa
- (डबिंग) बंद पार्सल, सबकी पुकार
- पहाड़ी लड़का, फिल्म सिटी में एंट्री
- ब्लू मशरूम का कहर
- आने वाली धूप
- (डबिंग) अनुभवी सैनिक का वादा
- दस साल, साँप का एहसान
- खदान के दिन
- अनुभवी सैनिक का वादा
- गायब पार्सल
- बंद पार्सल, सबकी पुकार
- खज़ाना मिलने के बाद मैं अजेय हो गया
- (डबिंग) घर-जमाई निकला अरबपति
- पिता का न्याय
- घर-जमाई निकला अरबपति